Sunday, 30 June 2024

Kismat...

खुद से लड़ लेते हैँ,ज़ब ज़माने से लड़ने की बात आती है, बहुत मुश्किल है,यूँ तो खुद को समझाना लेकिन, खुद को ही समझा लेते हैँ , ज़ब ज़माने को समझाने की बात आती है .
दर्द बढ़ता ही जाता है,इस ज़हन -ओ -दिल का , खुद ही दवा कर लेते हैँ ,जब इलाज करने की बात आती है .

Generation Gap

आज कल जनरेशन गैप 10 साल का नहीं 5 साल का हो गया है! हालांकि सबको अपनी ज़िन्दगी अपने तरीके से जीने का अधिकार है, मगर सिर्फ खुद में ही रहना और किसी को कुछ ना समझने वाली जनरेशन मेरी समझ से बाहर है! इतना क्यों अकेले हो गए हैँ हम! ना किसी पे विश्वास करते ना किसी को प्यार! खोखले लगते हैँ मुझे सब लोग! Mah lyf mah rules एक हद्द तक ठीक है, मगर मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है वाली बात नहीं रह गयी!
कहते हैँ कि आज कि जनरेशन सबसे ज़्यादा दुखी और डिप्रेस्ड जनरेशन है! सब सुख सुविधाएं होते हुए भी पता नहीं किस बात की कमी खलती है सबको, जो इतने दुखी हो गए हैँ!
ऐसा क्या है इनके अंतर्मन में जो ये किसी को बता नहीं पा रहें हैँ!
कोई चूक हों गयी क्या इनके माँ बाप से?
ना तो कमिटमेंट की बात करते हैँ ना मेहनत की!
जल्दी मन ऊब जाता हैँ हर चीज से! कैसे टिक पाएंगे इस तेज़ चलती ज़िन्दगी में! जल्दी बिखर जायेंगे!
एक ठहराव तो चाहिए ही होता है!
जितना समाज और इंसान तरक्की कर रहा है, उतना ही सबका मन दुविधा युक्त होता जा रहा है!
हम सब करते हैँ, अच्छे से रहना, खाना, वीकेंड पे पार्टी बस जी नहीं रहे!
बहुत लोगों ने पहाड़ों पे जाने में अपना दिल लगा लिया हैँ, ज़्यादा घूमने फिरने लगे हैँ, सब को ब्रेक चाहिए होता हैँ रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी से! तो भाई मेरे हिसाब से काम ऐसा पकड़ो जो मन के हिसाब का हो!
यूँ ज़बरदस्ती की ज़िन्दगी जीने से भी क्या होगा?
खुश रहना ज़िन्दगी का मक़सद होना चाहिए, ना की सिर्फ पैसे कामना! बस वो करो जिससे मनन प्रसंचित रहे!
यूँ उदासी भारी ज़िन्दगी जी कर क्या ही करना है! आने वाली नस्लों को और तबाह करना है!
इसलिए खुश रहें और जी भर जिए!
-प्रेरणा 



Monday, 23 March 2020

Kaisi ho tum...

कभी गर्मी की धूप सी चुभती हो ,
कभी सर्दी की धूप सी फब्ती हो !!
कभी रेगिस्तान के रेत सी जलाती हो ,
कभी समुंदर के पानी सी बुझाती हो !!
कभी सावन की बारिश सी बरस्ती हो ,
कभी ओस की बूंदो सी चमकती हो !!
कभी बच्चो सी नादान लगती हो ,
कभी गुरु सी विद्वान लगती हो !!

Saturday, 2 September 2017

Khamoshiyo ka silsila u he chalta rha, 
Tera Dil dukhane ka jazba na Tha, 
Armano ka janaza nikalta rha, 

Sunday, 1 September 2013

एक दर्द है दबा सा, एक आग सी लगी ।
देखो है वक़्त ने, कैसी नियति बुनी ॥
है आई फिर से आँधी , लेकर चुनर उडी ।
के दुनिया देखे है तमाशा , फिर आबरू लुटी ॥
थी वो किसकी बेटी, वो किसकी थी परी ।
जो थी सहमी - सहमी , जो थी डरी - डरी ॥
नौचा है उसको किसने, न दे रहा कोई गवाही ।
थे आदमी शक़ल में ,जंगली भेडिये कोई ॥

Sunday, 4 August 2013

Banjarapan....!!

बंजारे  की तरह फिरता है मन , कभी गुज़र के देख उसके  नगर |
बादल बन गरजता है मन, बरस ज़रा ,कभी रात भर ||
कोयल बन गाता है मन, न तू दिल में रख , कभी शोर कर |
पंछी बन चेह्चाहता है मन, कभी सांस ले के उड़ान भर ||
रंगों  में मिल जाता है मन, कभी रंग भर ,रंगरेज़ बन |
हवा सा जो बहता है मन, न ठहर कहीं तूफ़ान बन ||
न तो रंग भेद न तू द्वेष कर, तू संभल ज़रा, इंसान बन ||