Thursday, 27 September 2012

बात वो जो निष्पक्ष  हो, सभी के समक्ष  हो ।
पक्ष हो , विपक्ष हो ,
जो लागू हो तो दक्ष हो ।
हर युवा का लक्ष्य हो , रक्ष ही न भक्ष हो ।
देश पे जो मिट सके , ऐसा हर मनुष्य  हो ।।

Tuesday, 25 September 2012

किसको दें अपनी तकलीफों के इल्जाम  ।
बस किस्मत पे रोये जा रहे हैं ।।
करना पड़ा जो ज़िन्दगी  से समझौता ।
बस उसकी सज़ा खुद को दिए जा रहे हैं ।।
कीमत पड़ी चुकानी उसकी , जो खता न हुई हमसे ।
बस निभाने की कसम ली थी तुमसे ,
वही कसम निभाए जा रहे हैं ।।
कभी दिल लगता नहीं था , तन्हाईयों के संग ।
भीड़ में रहने का मज़ा अलग था, अलग थे सारे साथियों के रंग ।।

मस्ती थी , जज़्बात थे, निराली थी इस दुनिया में हमारी जंग ।
नहीं चाहते थे कभी धूमिल हों सपने, या रंग में पद जाये भंग ।।

वक़्त बदला , दिन बदले, छूट गए सब साथी और संग ।
अब ये वक़्त गुज़रता है, सिर्फ अपने साथ, चीख के कहने का मन करता है ।
के हाँ तन्हा हैं ज़िन्दगी , तन्हा हैं हम ।।
 कुछ तो  वजह दो हमें के तुम्हे भूल पाएं , एक इनकार ही काफी नहीं होता !!
हमारा आशियाँ छीन कर ,खुद का घरौंदा नहीं  बनाओगे  ,
इतना तो ऐतबार है हमें , उस खुदा के इन्साफ पे,
तुम भी हमारी तरह ही  चोट खाओगे !!

Friday, 7 September 2012

झूठे ख्वाब देख लेने दो मुझे , कम से कम  दिल तो बहल जाता है ।।

Sunday, 2 September 2012

भेद-भाव हमारी नहीं , ये तो ऊपर वाले की ही  माया है ।
ये वो श्राप है, जो सदियों से चला आया है।।
किसी का रंग काला , तो किसी की कैसी काया है ।
कोई रीति-रिवाज़ पे लड़ता है , तो किसी ने धर्मयुद्ध कर डाला है ।।
हर किसी को निगल रहा , ये अभिशाप निराला है ।
 कहीं गुंडे, तो कहीं नेताओं ने दबा डाला है ।।
जनता किससे करें अपने दर्द का बयाँ ,
 यहाँ तो रख वाला ही  भक्षक है, अमीरों का प्यादा है ।।
कुछ नया नहीं हुआ इस दुनिया में , सब कुछ वैसा ही है, सब कुछ पुराना है ।
जैसा है , वैसा ही चलता रहेगा, क्योंकि हमें जोखिम नहीं उठाना है ।।