अपनों का साथ नही तो क्या, अपनी परछाई पर पूरा विश्वास है |
रेत पर कुछ लिखते हैं कुछ मिटाते हैं,
तेरा नाम तो नही शायद फिर उभरे मेरे जज़्बात हैं |
Tuesday, 11 October 2011
हाँ, मैंने दुनिया को देखा है||
गारे की दीवार को ईंट में बदलते देखा है |
इतिहास के पन्नो को फिर बदलने का जज्बा देखा है,
हाँ, मैंने दुनिया को देखा है ||
दोस्तों को बदलते देखा है , रिश्तेदार को बदलते देखा है,
जो कहते थे उनकी ज़िन्दगी हैं हम, उनके अलफ़ाज़,उनके जज़्बात को बदलते देखा है,