बंजारे की तरह फिरता है मन , कभी गुज़र के देख उसके नगर |
बादल बन गरजता है मन, बरस ज़रा ,कभी रात भर ||
कोयल बन गाता है मन, न तू दिल में रख , कभी शोर कर |
पंछी बन चेह्चाहता है मन, कभी सांस ले के उड़ान भर ||
रंगों में मिल जाता है मन, कभी रंग भर ,रंगरेज़ बन |
हवा सा जो बहता है मन, न ठहर कहीं तूफ़ान बन ||
न तो रंग भेद न तू द्वेष कर, तू संभल ज़रा, इंसान बन ||
बादल बन गरजता है मन, बरस ज़रा ,कभी रात भर ||
कोयल बन गाता है मन, न तू दिल में रख , कभी शोर कर |
पंछी बन चेह्चाहता है मन, कभी सांस ले के उड़ान भर ||
रंगों में मिल जाता है मन, कभी रंग भर ,रंगरेज़ बन |
हवा सा जो बहता है मन, न ठहर कहीं तूफ़ान बन ||
न तो रंग भेद न तू द्वेष कर, तू संभल ज़रा, इंसान बन ||