Thursday, 4 October 2012

किसी ने हमसे पुछा क्या चीज़ है ये इश्क ?
हमने कहा-

जो नज़रों से दिल में उतर जाए , वो पैगाम है इश्क ।
जो बारिश बन कर बरस जाए, वो घटा है इश्क ।
जो कलियों के खिलने में नज़र आये ,वो अरमान है इश्क ।
बिखरे सूखे पत्तो की कडकडाहट में है इश्क ।
कल- कल करती नदी बहती हुई समुद्र में मिल जाए ,वो आलिंगन है इश्क ।
जब सूरज मधम हो जाये , और अपनी लालिमा फलक पे  बिखराए,
 वो अंदाज़ है इश्क ।
याद जब उनकी दिल से गुज़र जाए, उस मीठी याद का एहसास है इश्क ।
तरसती आँखों के लिए उनका एक दीदार है इश्क ।
वो मुस्कान, वो शरारत, उनकी हर एक अदा है इश्क ।
और इश्क चीज़ नहीं है यारो, हर दिल का फरमान है इश्क ।।

Thursday, 27 September 2012

बात वो जो निष्पक्ष  हो, सभी के समक्ष  हो ।
पक्ष हो , विपक्ष हो ,
जो लागू हो तो दक्ष हो ।
हर युवा का लक्ष्य हो , रक्ष ही न भक्ष हो ।
देश पे जो मिट सके , ऐसा हर मनुष्य  हो ।।

Tuesday, 25 September 2012

किसको दें अपनी तकलीफों के इल्जाम  ।
बस किस्मत पे रोये जा रहे हैं ।।
करना पड़ा जो ज़िन्दगी  से समझौता ।
बस उसकी सज़ा खुद को दिए जा रहे हैं ।।
कीमत पड़ी चुकानी उसकी , जो खता न हुई हमसे ।
बस निभाने की कसम ली थी तुमसे ,
वही कसम निभाए जा रहे हैं ।।
कभी दिल लगता नहीं था , तन्हाईयों के संग ।
भीड़ में रहने का मज़ा अलग था, अलग थे सारे साथियों के रंग ।।

मस्ती थी , जज़्बात थे, निराली थी इस दुनिया में हमारी जंग ।
नहीं चाहते थे कभी धूमिल हों सपने, या रंग में पद जाये भंग ।।

वक़्त बदला , दिन बदले, छूट गए सब साथी और संग ।
अब ये वक़्त गुज़रता है, सिर्फ अपने साथ, चीख के कहने का मन करता है ।
के हाँ तन्हा हैं ज़िन्दगी , तन्हा हैं हम ।।
 कुछ तो  वजह दो हमें के तुम्हे भूल पाएं , एक इनकार ही काफी नहीं होता !!
हमारा आशियाँ छीन कर ,खुद का घरौंदा नहीं  बनाओगे  ,
इतना तो ऐतबार है हमें , उस खुदा के इन्साफ पे,
तुम भी हमारी तरह ही  चोट खाओगे !!

Friday, 7 September 2012

झूठे ख्वाब देख लेने दो मुझे , कम से कम  दिल तो बहल जाता है ।।

Sunday, 2 September 2012

भेद-भाव हमारी नहीं , ये तो ऊपर वाले की ही  माया है ।
ये वो श्राप है, जो सदियों से चला आया है।।
किसी का रंग काला , तो किसी की कैसी काया है ।
कोई रीति-रिवाज़ पे लड़ता है , तो किसी ने धर्मयुद्ध कर डाला है ।।
हर किसी को निगल रहा , ये अभिशाप निराला है ।
 कहीं गुंडे, तो कहीं नेताओं ने दबा डाला है ।।
जनता किससे करें अपने दर्द का बयाँ ,
 यहाँ तो रख वाला ही  भक्षक है, अमीरों का प्यादा है ।।
कुछ नया नहीं हुआ इस दुनिया में , सब कुछ वैसा ही है, सब कुछ पुराना है ।
जैसा है , वैसा ही चलता रहेगा, क्योंकि हमें जोखिम नहीं उठाना है ।।


Sunday, 26 August 2012

उफ़ ये रुसवाई का डर।।
 न दर्द संभालता है, न कशमकश ख़त्म होती है  ।
 कभी इन्तेकाम लेने का जूनून होता  है, तो कभी  माफ़ कर देने में  सुकून मिलता है ।
ये कभी न ख़त्म होने वाली ज़हन की जंग है , जिसमें कभी हम जीतेते हैं तो कभी दिल जीतता है ।।


गर करते हम अपने इश्क का ज़िक्र इस दुनिया से  ,
तो वो बेवजह बदनाम हो जाते ।।
वो कौन है जो कहता है उसको मोह्हबत नहीं हुई,
इस दर्द से तो  हर एक दिल गुजरा होता है  ।।
कहने को ज़रा सी बात है , ये जो बदले हालात हैं ।
क्यों  आँखें  नम हो जाती हैं ,जब याद उन पलों की आती है ।।

क्यों होती है बेचैनी सी,जब ज़िक्र तुम्हारा होता कहीं ।
क्यों धड़कन ठहर जाती है , जब तेरे आने की आहट होती है ।।

क्यों दिल इजाज़त देता है ,तेरे एक दीदार का ।
जब इल्म है तू मेरा नहीं ,बनेगा किसी और का ।।

क्यों एहसास होता है तुझे मेरी बेंतेहाँ मोह्हबत का ।
क्यों तेरे हर इन्कार से , तेरी एक मजबूरी सी झलकती है ।।


Thursday, 19 April 2012

बिन नशे के  ,नशे में हूँ तो नशा क्या करू,अपने इस होने का उस खुदा से गिला क्या करू।
कुछ तो लोग ऐसे हैं,कुछ माहौल बुरा है,
तो अपने गम-ऐ -उल्फत का हाल बयां क्या करू।

Friday, 6 April 2012

As I completed a quarter of my lyf... wat I observed and learnt til nw is dat nobody
cared what I wanted to become,what I wanted in my life.!! whom I loved,whom
I wanted to care for.!! what I expected frm my own ppl.what al I did to keep ppl happy around me.!! hw much I
sacrificed.Nw I realised hw happy I cud be if I wud hv thought jst abt  meeeeee..!!!!