कहते हैँ कि आज कि जनरेशन सबसे ज़्यादा दुखी और डिप्रेस्ड जनरेशन है! सब सुख सुविधाएं होते हुए भी पता नहीं किस बात की कमी खलती है सबको, जो इतने दुखी हो गए हैँ!
ऐसा क्या है इनके अंतर्मन में जो ये किसी को बता नहीं पा रहें हैँ!
कोई चूक हों गयी क्या इनके माँ बाप से?
ना तो कमिटमेंट की बात करते हैँ ना मेहनत की!
जल्दी मन ऊब जाता हैँ हर चीज से! कैसे टिक पाएंगे इस तेज़ चलती ज़िन्दगी में! जल्दी बिखर जायेंगे!
एक ठहराव तो चाहिए ही होता है!
जितना समाज और इंसान तरक्की कर रहा है, उतना ही सबका मन दुविधा युक्त होता जा रहा है!
हम सब करते हैँ, अच्छे से रहना, खाना, वीकेंड पे पार्टी बस जी नहीं रहे!
बहुत लोगों ने पहाड़ों पे जाने में अपना दिल लगा लिया हैँ, ज़्यादा घूमने फिरने लगे हैँ, सब को ब्रेक चाहिए होता हैँ रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी से! तो भाई मेरे हिसाब से काम ऐसा पकड़ो जो मन के हिसाब का हो!
यूँ ज़बरदस्ती की ज़िन्दगी जीने से भी क्या होगा?
खुश रहना ज़िन्दगी का मक़सद होना चाहिए, ना की सिर्फ पैसे कामना! बस वो करो जिससे मनन प्रसंचित रहे!
यूँ उदासी भारी ज़िन्दगी जी कर क्या ही करना है! आने वाली नस्लों को और तबाह करना है!
इसलिए खुश रहें और जी भर जिए!
-प्रेरणा
बहुत सही और बहुत अच्छा लिखा है, आज की हकीकत बतायी है....
ReplyDeleteधन्यवाद 🙏🏻
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