उफ़ ये रुसवाई का डर।।
न दर्द संभालता है, न कशमकश ख़त्म होती है ।
कभी इन्तेकाम लेने का जूनून होता है, तो कभी माफ़ कर देने में सुकून मिलता है ।
ये कभी न ख़त्म होने वाली ज़हन की जंग है , जिसमें कभी हम जीतेते हैं तो कभी दिल जीतता है ।।
न दर्द संभालता है, न कशमकश ख़त्म होती है ।
कभी इन्तेकाम लेने का जूनून होता है, तो कभी माफ़ कर देने में सुकून मिलता है ।
ये कभी न ख़त्म होने वाली ज़हन की जंग है , जिसमें कभी हम जीतेते हैं तो कभी दिल जीतता है ।।
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